Good morning PM sir mera naam Priyanka ladha hai main ek house wife hoon meri age 38 hai kya hum jaisi house wife ke liye earning ka koi sadhan nhi hai main self reliant hona chahti hoon taki kal jab main ghar se bahar nikloon toh na pita ka sahara lena pade na pati ka na hi bete ka main khud ko is title se bahar karna chahti hoon please suggest me sir what I do please help me out
Respected Hon"ble Modi Ji,
I think, people of India, consider you More as Guide and Friend. In view of education and employment, it is the need of the hour that Reservation be totally vanished in all areas, so that all human beings can enjoy full rights. And this, we all know, can be done by your goodself only. May be it can take time, but only your goodself can do.
With regards,
🚧 विकास की चमक या पानी का संकट? — पक्की सड़कों की सच्चाई
देश में विकास का पैमाना अब पक्की सड़कों की संख्या बन गया है। सड़कें तेजी से बन रही हैं, लेकिन एक अहम सवाल अनदेखा है—क्या वर्षा का जल जमीन में जा पा रहा है?
सच्चाई यह है कि देश में ज्यादातर पक्की सड़कों के निर्माण में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शामिल ही नहीं किए जाते। पूरी तरह सीमेंट और डामर से ढकी सतह वर्षा जल को सीधे नालों में बहा देती है। भू-जल का प्राकृतिक पुनर्भरण रुक जाता है, और फिर हम कहते हैं—जल स्तर गिर रहा है, हैंडपंप सूख रहे हैं।
बड़ी परियोजनाओं, उद्घाटनों और घोषणाओं पर तो पूरा ध्यान दिया जाता है, लेकिन ऐसी बुनियादी बातों पर न पर्याप्त ध्यान दिया जाता है, न सख्ती। आखिर क्यों?
केवल नई सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है। हर सड़क के साथ वर्षा जल संचयन और सोख्ता व्यवस्था अनिवार्य हो—तभी विकास और जल संरक्षण साथ चल पाएंगे। 🌧️
⚠️ चेतावनी: पक्की सड़कों का अंधाधुंध निर्माण जल संकट को आमंत्रण दे रहा है
देश में विकास के नाम पर तेजी से पक्की सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इसका हमारे भू-जल पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
आज हालात यह हैं कि देश में ज्यादातर पक्की सड़कों के निर्माण में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शामिल ही नहीं किए जाते। सड़कें पूरी तरह सीमेंट और डामर से ढक दी जाती हैं, जिससे वर्षा का जल जमीन में समाहित होने के बजाय सीधे नालों में बह जाता है।
यह केवल पानी का बहाव नहीं है — यह हमारे भविष्य का बहाव है।
🔴 गंभीर परिणाम
भू-जल का प्राकृतिक पुनर्भरण रुक रहा है।
जल-स्तर लगातार गिर रहा है।
भविष्य में पेयजल संकट और अधिक गहरा सकता है।
शहरी बाढ़ और ग्रामीण सूखे जैसी दोहरी समस्या बढ़ रही है।
केवल नई सड़कें बनाना ही विकास नहीं है।
यदि सड़क निर्माण के साथ वर्षा जल संचयन और सोख्ता व्यवस्था अनिवार्य नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में इसका दुष्परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है।
अब समय है कि सड़क निर्माण नीति में सुधार हो —