KUMARAGANESHS
8 months 3 weeks ago
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इसके परिणामस्वरूप लाखों पतियों की आय राष्ट्र की आर्थिक विकास में योगदान देने के बजाय व्यर्थ हो रही है।
इसलिए, मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता/करती हूँ कि आजीवन भरण-पोषण की व्यवस्था को बदलकर एक या दो वर्ष की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की जाए।
इससे महिलाएँ अपनी शिक्षा और कौशल का सकारात्मक उपयोग करके कार्यबल में शामिल होंगी और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकेंगी।
धन्यवाद।
भारती
(एक भारतीय)
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