Dayakrishan Pandey
8 months 2 weeks ago
आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,
सादर प्रणाम।
मैं आपका ध्यान एक ऐसे वैश्विक दृष्टिकोण की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जो न केवल भारत को बल्कि संपूर्ण मानवता को एक नए स्वर्णिम युग की ओर ले जा सकता है। मेरा यह प्रस्ताव परमाणु ऊर्जा के उस 'विशुद्ध स्वरूप' पर आधारित है, जिसका उपयोग हम विनाश के बजाय विकास और ब्रह्मांडीय विस्तार के लिए कर सकते हैं
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