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गणतंत्र दिवस के लिए ई-शुभकामना संदेश बनाएं

Design e-greetings for Republic Day
आरंभ करने की तिथि :
Jan 09, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 25, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

26 जनवरी 1950 को भारत एक गणतंत्र देश बना। तब से इस दिन को हमारे संप्रभु ...

26 जनवरी 1950 को भारत एक गणतंत्र देश बना। तब से इस दिन को हमारे संप्रभु लोकतांत्रिक गौरव को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। यह एक ऐसा दिन है जब हम एक राष्ट्र के रूप में अपनी उपलब्धियों को याद करते हैं और उन लोगों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने भारत की प्रगति और समाज के कल्याण में अपना योगदान दिया।

राष्ट्र गौरव के इस अवसर को मनाने के लिए ई-शुभकामना सन्देश बनाएं।

प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 24 जनवरी 2015 है।

विजेता प्रविष्टियों को निम्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा-

1. प्रथम पुरस्कार - रु. 10,000/-
2. दूसरा पुरस्कार- रु. 7,500/-
3. तीसरा पुरस्कार- रु. 5,000/-

नियम एंव शर्तें

1. प्रविष्टि पोर्ट्रेट लेआउट में 10 X 12 सेमी के आकार की होनी चाहिए। किसी भी अलग आकार और लेआउट में प्राप्त हुई प्रविष्टियाँ स्वीकार्य नहीं होंगी।

2. चयन समिति द्वारा चयनित प्रविष्टियों को पोर्टल पर प्रकाशित किया जाएगा।

3. इस अवसर के 15 दिनों के अंतर्गत(10/2/2015 को शाम 5 बजे तक) जिस प्रविष्टि को नागरिकों द्वारा सबसे अधिक पसंद किया जाएगा या भेजा जाएगा उनमें से तीन प्रविष्टियों को विजेता घोषित कर उन्हें क्रमशः रु. 10,000/,- रु. 7,500/-, रु. 5,000/- के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

4. इसके बाद केवल 20 सबसे अधिक भेजी गई प्रविष्टियों को ही पोर्टल पर प्रकाशित किया जाएगा।

5. प्रविष्टि प्रतिभागी का मूल कार्य होना चाहिए। पहले से उपलब्ध प्रविष्टियाँ भेजने वाले प्रतिभागी को भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

खंडन – चयन समिति द्वारा प्रविष्टियों की मौलिकता की जांच करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा हालाँकि मेरी सरकार और ई-शुभकामना सन्देश पोर्टल किसी भी अमौलिक कार्य के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।

इस कार्य के लिए प्राप्त हुई प्रविष्टियाँ
757
कुल
624
स्वीकृत
133
समीक्षाधीन
फिर से कायम कर देना
624 सबमिशन दिखा रहा है
Vijay Sharma
Vijay Sharma 11 साल 7 महीने पहले
VASUDEV KUTUMBAKAM pure vishwa me ek matra hum bharatiya hi hai jo bina ahankar ke dusre se irshya ke bina, pure vishva ko aage barne ka sanskar dete hain. hum atankvaad,chuachut,nafrat ko pure vishva se hatane ka sankalpa karte hai. HUM SABKA SAATH SABKA VIKAS KE HIMAAYTI HAI. JAI HO.
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prashant singh
prashant singh 11 साल 7 महीने पहले
Prashant Singh 16/01/2015 "Oneness amongst men, the advancement of unity in diversity-- this has been the core religion of India." Despite of various diversities there is a thread of unity which bind us all just like the different fingers in a palm. No one can devide us in the name religion,race and caste. "HaPpY RePbULiC dAY" " VANDE MATARAM"
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