Dayakrishan Pandey
11 महीने 4 सप्ताह पहले
प्रभु कृपा सुमिरन प्रणाम महोदय आज में जीना कालातीत जीना याद करके ही रामराज्य की आंशिक परिभाषा याद आ सकती है पूर्ण परिभाषा पूरे यूनिवर्स पर लागू होती है लेकिन धरा का मानव आंशिक को भी याद नहीं कर पा रहा है मन की बात से एक प्रॉसेस से धरा पर आंशिक परिभाषा की याद आने लग गईं है अभी भी कई समस्याएं हैं जिन्हे जन सहभागिता से ही दूर किया जा सकता है जो हो रहा है आध्यात्म से जुड़े लोगों का नाम मन की बात में आना ही चाहिए तब सबको प्रेरणा मिलेगी आध्यात्म से जुड़ने की तभी मन के रिक्त स्थान की पूर्ति संभव....
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