Vikas Mudgil
12 years 3 weeks ago
में आपके साथ २ अक्टूबर २०१४ की एक घटना शेयर करना चाहता हूँ ,उस दिन मैं सुबह गुड़गाओं के एक मंदिर में गया हुआ था ,नवरात्रों का अंतिम दिन होने के कारण मंदिर में काफी भीड़ थी और में पंक्ति में खड़ा था । श्रद्धालु लोग जो माता के दर्शन कर चुके थे वो मंदिर से बहार जाते वक्त प्रसाद के लिफाफे व अन्य बचा हुआ सामान इधर उधर फ़ेंक रहे थे । मंदिर की सफाई करने वाले कर्मचारी कुछ ही दूरी पर झाड़ू लगा रहे थे ,उनकी मेहनत व लोगों की लापरवाही देख कर मन अशांत हो गया और लगा की अगर हम अगर अपने छोटे छोटे सामाजिक कर्त
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