SUBHAM GUPTA
11 years 3 months ago
हमारा भारत,संभावनाओ का देश है,मानवीय संवेदनाओ का देश है
पर आज राह चलते अक्सर देखता हूँ की मॉडर्न बनने की कवायद में युवा भारत मानवीय संवेदनाओ को थोडा कम महत्व देता है,मैं सड़क के किनारे पड़ी बीमार गाय को देखता हूँ उसकी कोई सुधि नहीं लेता क्यूंकि वो अब दूध नहीं देती न!
मैं ट्रेनों में वृद्ध-बुजुर्गो को भीक्षा मांगते देखता हूँ,हजारो की तादाद में इस देश में भरे पड़े एन.जी.ओ में से कोई भी उनकी और हाथ नहीं बढाता,मैं अक्सर कुछ अनगढ़ युवा प्रतिभाओ को ट्रेनों में देखता हूँ,जिनकी कोई सुधि नहीं लेता..
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